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कृष्ण जन्म
Krishna Janma
कंस के कारागार में देवकी और वसुदेव के यहाँ भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ। भगवान ने पहले चतुर्भुज विष्णु रूप में दर्शन दिए और फिर माता-पिता की प्रार्थना पर बालक का रूप धारण किया। वसुदेव श्रीकृष्ण को लेकर गोकुल पहुँचे और उन्हें नंद महाराज के घर यशोदा के पास पहुँचा दिया।
कथा
`मथुरा में राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया था। भविष्यवाणी के अनुसार देवकी का आठवाँ पुत्र कंस के अंत का कारण बनेगा। इसी भय से कंस देवकी की संतानों को मारता गया। जब आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण के प्राकट्य का समय आया, तब रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण देवकी के गर्भ से प्रकट हुए। श्रीमद्भागवत के अनुसार उन्होंने पहले चतुर्भुज भगवान विष्णु के दिव्य रूप में दर्शन दिए। उनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म थे तथा वे दिव्य आभूषणों से सुशोभित थे। वसुदेव और देवकी ने भगवान की स्तुति की और उनसे कंस के भय से सामान्य बालक का रूप धारण करने की प्रार्थना की। भगवान ने वसुदेव और देवकी को अपने पूर्व प्राकट्यों की भी स्मृति कराई और बताया कि वे उनके पुत्र के रूप में पहले भी प्रकट हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने बालक का रूप धारण किया। उसी समय भगवान की योगमाया की व्यवस्था से वसुदेव के लिए कारागार से बाहर निकलने का मार्ग खुल गया। वसुदेव नवजात श्रीकृष्ण को लेकर गोकुल की ओर चल पड़े। वे यमुना नदी को पार करके नंद महाराज के घर पहुँचे। वहाँ सभी गोप गहरी नींद में थे। वसुदेव ने श्रीकृष्ण को यशोदा के शयन स्थान पर रख दिया और वहाँ उपस्थित कन्या को लेकर वापस मथुरा के कारागार में लौट आए। वह कन्या योगमाया का स्वरूप थी। वसुदेव ने उसे देवकी के पास रख दिया और फिर पहले की तरह कारागार में बंध गए। इस प्रकार श्रीकृष्ण का प्राकट्य केवल एक दिव्य जन्म-कथा के रूप में नहीं, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना, भक्तों की रक्षा और भगवान के पृथ्वी पर अवतरण की महत्वपूर्ण लीला के रूप में वर्णित किया जाता है।`
सरल रूप
श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में देवकी और वसुदेव के यहाँ हुआ। वे भगवान विष्णु के दिव्य रूप में प्रकट हुए और फिर एक छोटे बालक का रूप धारण किया। वसुदेव उन्हें रात में गोकुल ले गए और नंद-यशोदा के घर पहुँचा दिया। इसके बाद श्रीकृष्ण का बाल्य जीवन गोकुल और वृंदावन में आरंभ हुआ।
बच्चों के लिए
`बहुत समय पहले मथुरा में कंस नाम का एक राजा था। उसे डर था कि देवकी का पुत्र एक दिन उसका अंत करेगा। इसलिए उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। एक रात देवकी के यहाँ श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। वे बहुत सुंदर और दिव्य बालक थे। वसुदेव ने उन्हें सुरक्षित रखने के लिए एक टोकरी में लिया और रात के समय गोकुल की ओर चल पड़े। वे नंद बाबा और यशोदा माता के घर पहुँचे और बालक कृष्ण को वहाँ छोड़कर वापस मथुरा चले गए। इस तरह श्रीकृष्ण का गोकुल में सुंदर बाल्य जीवन शुरू हुआ। यह कथा हमें बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर पर विश्वास और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।`
सार
श्रीकृष्ण सुरक्षित रूप से गोकुल पहुँचाए गए और नंद तथा यशोदा के संरक्षण में उनका बाल्य जीवन आरंभ हुआ। मथुरा में कंस को यह ज्ञात नहीं हुआ कि जिस बालक से वह भयभीत था, वह सुरक्षित रूप से गोकुल पहुँच चुका है।
शिक्षा
कठिन परिस्थितियों में भी धर्म, विश्वास और सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। ईश्वर पर श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति भय और संकट के बीच भी आशा बनाए रख सकता है।
महत्त्व
कृष्ण जन्म हिंदू और विशेष रूप से वैष्णव परंपरा की सबसे महत्वपूर्ण लीलाओं में से एक है। यह भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी पर प्राकट्य और उनके दिव्य कार्यों के आरंभ का आधार है। श्रीमद्भागवत में इस प्रसंग में भगवान के दिव्य स्वरूप, देवकी-वसुदेव की भक्ति तथा गोकुल में उनके स्थानांतरण का वर्णन मिलता है।
पात्र
कृष्ण
avatar
The eighth avatar of Vishnu, the cowherd of Vrindavan and the speaker of the Bhagavad Gita.
वसुदेव
deity
The father of Krishna, who carried him across the Yamuna.
देवकी
deity
The mother of Krishna, imprisoned by Kamsa at Mathura.
कंस
character
विष्णु
deity
The preserver of the cosmos, who descends in every age to restore dharma.
अन्य नाम

