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श्रीमद् भागवतम्

श्रीमद्भागवतम्

smritiSanskrit

भगवान की लीलाओं का महापुराण

12 स्कन्धVyasac. 8th–10th century CE (per most scholarship); the tradition holds it contemporaneous with Vyasa

परिचय

व्यास रचित महापुराण, बारह स्कंधों में — सृष्टि से लेकर श्रीकृष्ण की लीलाओं एवं भक्ति के परम रहस्य तक।

महत्त्व

श्रीमद्भागवतम् को वैष्णव भक्ति परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। इसमें भगवान के विभिन्न अवतारों, भक्तों की कथाओं और भक्ति के स्वरूप का विस्तार से वर्णन है। दशम स्कंध में श्रीकृष्ण की वृंदावन, मथुरा और द्वारका से संबंधित लीलाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है।

इतिहास

श्रीमद्भागवतम् की पारंपरिक कथा के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने इसका संकलन किया और उनके पुत्र शुकदेव गोस्वामी ने राजा परीक्षित को इसका उपदेश दिया। बाद में सूत गोस्वामी ने नैमिषारण्य में उपस्थित ऋषियों को इसका वर्णन किया। आधुनिक ऐतिहासिक अध्ययन इसके वर्तमान पाठ के निर्माण और संकलन को लेकर अलग-अलग मत प्रस्तुत करता है।

मूल दर्शन

भक्ति को परम आध्यात्मिक साधना के रूप में स्वीकार करना, भगवान के प्रति प्रेम और शरणागति विकसित करना, संसार के प्रति वैराग्य तथा आत्मज्ञान प्राप्त करना और धर्मपूर्ण जीवन के माध्यम से परम सत्य की ओर अग्रसर होना।

मुख्य शिक्षाएँ

भगवान के प्रति निष्काम भक्ति, संतों और भक्तों की संगति, भगवान के नाम एवं गुणों का श्रवण और कीर्तन, धर्म का पालन, अहंकार का त्याग, संसार की अनित्यता का विवेक, वैराग्य तथा परमात्मा के प्रति पूर्ण शरणागति।

पाठ कैसे करें

नए पाठक के लिए पहले प्रथम स्कंध का परिचय और भागवत की मूल कथा-भूमि समझना उपयोगी है। इसके बाद द्वितीय स्कंध से ब्रह्मविद्या और भक्ति के व्यापक स्वरूप को समझा जा सकता है। श्रीकृष्ण की लीलाओं में विशेष रुचि रखने वाले भक्त दशम स्कंध का अध्ययन कर सकते हैं, लेकिन उसे पूर्ववर्ती स्कंधों की पृष्ठभूमि के साथ पढ़ना अधिक उपयोगी है।

सरल रूप

सरल शब्दों में, श्रीमद्भागवतम् भगवान, भक्ति और भक्त के संबंध को समझाने वाला विशाल धार्मिक ग्रंथ है। इसमें अनेक कथाओं के माध्यम से बताया गया है कि मनुष्य धर्म, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के द्वारा अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा दे सकता है।

अन्य नाम

Bhagavata Puranaभागवत पुराणBhagavatam

स्कन्ध

01

प्रथम स्कंध

स्कंध 1 — प्रथम स्कंध।

02

द्वितीय स्कंध

स्कंध 2 — द्वितीय स्कंध।

03

तृतीय स्कंध

स्कंध 3 — तृतीय स्कंध।

04

चतुर्थ स्कंध

स्कंध 4 — चतुर्थ स्कंध।

05

पंचम स्कंध

स्कंध 5 — पंचम स्कंध।

06

षष्ठ स्कंध

स्कंध 6 — षष्ठ स्कंध।

07

सप्तम स्कंध

स्कंध 7 — सप्तम स्कंध।

08

अष्टम स्कंध

स्कंध 8 — अष्टम स्कंध।

09

नवम स्कंध

स्कंध 9 — नवम स्कंध।

10

दशम स्कंध — श्रीकृष्ण लीला

स्कंध 10 — दशम स्कंध — श्रीकृष्ण लीला।

11

एकादश स्कंध

स्कंध 11 — एकादश स्कंध।

12

द्वादश स्कंध

स्कंध 12 — द्वादश स्कंध।