philosophy
श्रीमद् भगवद् गीता
श्रीमद्भगवद्गीता
भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य उपदेश
परिचय
कुरुक्षेत्र के रणभूमि में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया कर्म, भक्ति एवं ज्ञान का अमर उपदेश — 18 अध्यायों में।
अन्य नाम
अध्याय
अर्जुनविषाद योग
अध्याय 1 — अर्जुनविषाद योग।
सांख्य योग
अध्याय 2 — सांख्य योग।
कर्म योग
अध्याय 3 — कर्म योग।
ज्ञान-कर्म-संन्यास योग
अध्याय 4 — ज्ञान-कर्म-संन्यास योग।
कर्म संन्यास योग
अध्याय 5 — कर्म संन्यास योग।
आत्मसंयम (ध्यान) योग
अध्याय 6 — आत्मसंयम (ध्यान) योग।
ज्ञान-विज्ञान योग
अध्याय 7 — ज्ञान-विज्ञान योग।
अक्षरब्रह्म योग
अध्याय 8 — अक्षरब्रह्म योग।
राजविद्या-राजगुह्य योग
अध्याय 9 — राजविद्या-राजगुह्य योग।
विभूति योग
अध्याय 10 — विभूति योग।
विश्वरूप दर्शन योग
अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग।
भक्ति योग
अध्याय 12 — भक्ति योग।
क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग
अध्याय 13 — क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग।
गुणत्रय विभाग योग
अध्याय 14 — गुणत्रय विभाग योग।
पुरुषोत्तम योग
अध्याय 15 — पुरुषोत्तम योग।
दैवासुर-संपद्-विभाग योग
अध्याय 16 — दैवासुर-संपद्-विभाग योग।
श्रद्धात्रय विभाग योग
अध्याय 17 — श्रद्धात्रय विभाग योग।
मोक्ष-संन्यास योग
अध्याय 18 — मोक्ष-संन्यास योग।
