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मेरो वृंदावन
राजविद्याराजगुह्ययोग
9.16श्रीकृष्ण

अहं क्रतुरहं यज्ञः स्वधाऽहमहमौषधम्। मंत्रोऽहमहमेवाज्यमहमग्निरहं हुतम्।।9.16।।

ahaṁ kratur ahaṁ yajñaḥ svadhāham aham auṣhadham mantro ’ham aham evājyam aham agnir ahaṁ hutam

।।9.16 -- 9.18।।  क्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत्का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान तथा अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ।

भक्तिक्रिया

शब्दार्थ

aham

I

kratuḥ

Vedic ritual

aham

I

yajñaḥ

sacrifice

svadhā

oblation

aham

I

aham

I

auṣhadham

medicinal herb

mantraḥ

Vedic mantra

aham

I

aham

I

eva

also

ājyam

clarified butter

aham

I

agniḥ

fire

aham

I

hutam

the act offering

अनुवाद

I am Kratu; I am Yajna; I am the offering to the manes; I am the medicinal herbs and all plants; I am the Mantra; I am also the ghee or melted butter; I am the fire; I am the oblation.

Swami Sivananda · meaning

I am the oblation, the sacrifice, and the worship; I am the fuel and the chant; I am the butter offered to the fire; I am the fire itself, and I am the act of offering.

Shri Purohit Swami · simple

।।9.16 -- 9.18।।  क्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत्का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान तथा अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ।

Swami Ramsukhdas · meaning

।।9.16।। मैं ऋक्रतु हूँ; मैं यज्ञ हूँ; स्वधा और औषध मैं हूँ, मैं मन्त्र हूँ, घी हूँ, मैं अग्नि हूँ और हुतं अर्थात् हवन कर्म मैं हूँ।।

Swami Tejomayananda · simple

भाष्य

Acharya आदि शंकराचार्य · advaita

।।9.16।। --,अहं क्रतुः श्रौतकर्मभेदः अहमेव। अहं यज्ञः स्मार्तः। किञ्च स्वधा अन्नम् अहम्? पितृभ्यो यत् दीयते। अहम् औषधं सर्वप्राणिभिः यत् अद्यते तत् औषधशब्दशब्दितं व्रीहियवादिसाधारणम्। अथवा स्वधा इति सर्वप्राणिसाधारणम् अन्नम्? औषधम् इति व्याध्युपशमनार्थं भेषजम्। मन्त्रः अहम्? येन पितृभ्यो देवताभ्यश्च हविः दीयते। अहमेव आज्यं हविश्च। अहम् अग्निः? यस्मिन् हूयते हविः सः अग्निः अहम्। अहं हुतं हवनकर्म च।।किञ्च --,

मुख्य शब्द

worshipact