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मेरो वृंदावन
राजविद्याराजगुह्ययोग
9.15श्रीकृष्ण

ज्ञानयज्ञेन चाप्यन्ये यजन्तो मामुपासते। एकत्वेन पृथक्त्वेन बहुधा विश्वतोमुखम्।।9.15।।

jñāna-yajñena chāpyanye yajanto mām upāsate ekatvena pṛithaktvena bahudhā viśhvato-mukham

।।9.15।। दूसरे साधक ज्ञानयज्ञके द्वारा एकीभावसे (अभेद-भावसे) मेरा पूजन करते हुए मेरी उपासना करते हैं और दूसरे कई साधक अपनेको पृथक् मानकर चारों तरफ मुखवाले मेरे विराट्ररुपकी अर्थात् संसारको मेरा विराट्ररुप मानकर (सेव्य-सेवकभावसे) मेरी अनेक प्रकारसे उपासना करते हैं।

भक्तिज्ञान

शब्दार्थ

jñāna-yajñena

yajña of cultivating knowledge

cha

and

api

also

anye

others

yajantaḥ

worship

mām

me

upāsate

worship

ekatvena

undifferentiated oneness

pṛithaktvena

separately

bahudhā

various

viśhwataḥ-mukham

the cosmic form

अनुवाद

Others also, sacrificing with the wisdom-sacrifice, worship Me, the All-Faced, as one, distinct, and manifold.

Swami Sivananda · meaning

Others worship Me with full consciousness as the One, the Manifold, the Omnipresent, and the Universal.

Shri Purohit Swami · simple

।।9.15।। दूसरे साधक ज्ञानयज्ञके द्वारा एकीभावसे (अभेद-भावसे) मेरा पूजन करते हुए मेरी उपासना करते हैं और दूसरे कई साधक अपनेको पृथक् मानकर चारों तरफ मुखवाले मेरे विराट्ररुपकी अर्थात् संसारको मेरा विराट्ररुप मानकर (सेव्य-सेवकभावसे) मेरी अनेक प्रकारसे उपासना करते हैं।

Swami Ramsukhdas · meaning

।।9.15।। कोई मुझे ज्ञानयज्ञ के द्वारा पूजन करते हुए एकत्वभाव से उपासते हैं, कोई पृथक भाव से, कोई बहुत प्रकार से मुझ विराट स्वरूप (विश्वतो मुखम्) को उपासते हैं।।

Swami Tejomayananda · simple

भाष्य

Acharya आदि शंकराचार्य · advaita

।।9.15।। -- --,ज्ञानयज्ञेन ज्ञानमेव भगवद्विषयं यज्ञः तेन ज्ञानयज्ञेन? यजन्तः पूजयन्तः माम् ईश्वरं च अपि अन्ये अन्याम् उपासनां परित्यज्य उपासते। तच्च ज्ञानम् -- एकत्वेन एकमेव परं ब्रह्म इति परमार्थदर्शनेन यजन्तः उपासते। केचिच्च पृथक्त्वेन, आदित्यचन्द्रादिभेदेन स एव भगवान् विष्णुः अवस्थितः इति उपासते। केचित् बहुधा अवस्थितः स एव भगवान् सर्वतोमुखः विश्वरुपः इति तं विश्वरूपं सर्वतोमुखं बहुधा बहुप्रकारेण उपासते।।यदि बहुभिः प्रकारैः उपासते? कथं त्वामेव उपासते इति? अत आह --,

मुख्य शब्द

worshipwisdom