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मेरो वृंदावन
राजविद्याराजगुह्ययोग
9.18श्रीकृष्ण

गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत्। प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम्।।9.18।।

gatir bhartā prabhuḥ sākṣhī nivāsaḥ śharaṇaṁ suhṛit prabhavaḥ pralayaḥ sthānaṁ nidhānaṁ bījam avyayam

।।9.16 -- 9.18।।  क्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत्का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान तथा अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ।

जीवनमृत्यु

शब्दार्थ

gatiḥ

the supreme goal

bhartā

sustainer

prabhuḥ

master

sākṣhī

witness

nivāsaḥ

abode

śharaṇam

shelter

su-hṛit

friend

prabhavaḥ

the origin

pralayaḥ

dissolution

sthānam

store house

nidhānam

resting place

bījam

seed

avyayam

imperishable

अनुवाद

I am the goal, the supporter, the Lord, the witness, the abode, the shelter, the friend, the origin, the dissolution, the foundation, the treasure-house, and the imperishable seed.

Swami Sivananda · meaning

I am the goal, the sustainer, the Lord, the witness, the home, the shelter, the lover, and the origin; I am life and death; I am the fountain and the imperishable seed.

Shri Purohit Swami · simple

।।9.16 -- 9.18।।  क्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत्का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान तथा अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ।

Swami Ramsukhdas · meaning

।।9.18।। गति (लक्ष्य), भरण-पोषण करने वाला, प्रभु (स्वामी), साक्षी, निवास, शरणस्थान तथा मित्र और उत्पत्ति, प्रलयरूप तथा स्थान (आधार), निधान और अव्यय कारण भी मैं हूँ।।

Swami Tejomayananda · simple

भाष्य

Acharya आदि शंकराचार्य · advaita

।।9.18।। --,गतिः कर्मफलम्? भर्ता पोष्टा? प्रभुः स्वामी? साक्षी प्राणिनां कृताकृतस्य? निवासः यस्मिन् प्राणिनो निवसन्ति? शरणम् आर्तानाम्? प्रपन्नानामार्तिहरः। सुहृत् प्रत्युपकारानपेक्षः सन् उपकारी? प्रभवः उत्पत्तिः जगतः? प्रलयः प्रलीयते अस्मिन् इति? तथा स्थानं तिष्ठति अस्मिन् इति? निधानं निक्षेपः कालान्तरोपभोग्यं प्राणिनाम्? बीजं प्ररोहकारणं प्ररोहधर्मिणाम्? अव्ययं यावत्संसारभावित्वात् अव्ययम्? न हि अबीजं किञ्चित् प्ररोहति नित्यं च प्ररोहदर्शनात् बीजसंततिः न व्येति इति गम्यते।।किञ्च --,

मुख्य शब्द

lifedeath