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मेरो वृंदावन
राजविद्याराजगुह्ययोग
9.12श्रीकृष्ण

मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः। राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः।।9.12।।

moghāśhā mogha-karmāṇo mogha-jñānā vichetasaḥ rākṣhasīm āsurīṁ chaiva prakṛitiṁ mohinīṁ śhritāḥ

।।9.12।। जिनकी सब आशाएँ व्यर्थ होती हैं, सब शुभ-कर्म व्यर्थ होते हैं और सब ज्ञान व्यर्थ होते हैं अर्थात् जिनकी आशाएँ, कर्म और ज्ञान सत्-फल देनेवाले नहीं होते, ऐसे अविवेकी मनुष्य आसुरी, राक्षसी और मोहिनी फकृतिका आश्रय लेते हैं।

कर्मज्ञानक्रिया

शब्दार्थ

mogha-āśhāḥ

of vain hopes

mogha-karmāṇaḥ

of vain actions

mogha-jñānāḥ

of baffled knowledge

vichetasaḥ

deluded

rākṣhasīm

demoniac

āsurīm

atheistic

cha

and

eva

certainly

prakṛitim

material energy

mohinīm

bewildered

śhritāḥ

take shelter

अनुवाद

They are possessed of the deceitful nature of demons and undivine beings, filled with vain hopes, vain actions, and vain knowledge that is senseless.

Swami Sivananda · meaning

Their hopes are futile, their actions worthless, their knowledge ineffective; they are without sense, deceitful, barbaric, and godless.

Shri Purohit Swami · simple

।।9.12।। जिनकी सब आशाएँ व्यर्थ होती हैं, सब शुभ-कर्म व्यर्थ होते हैं और सब ज्ञान व्यर्थ होते हैं अर्थात् जिनकी आशाएँ, कर्म और ज्ञान सत्-फल देनेवाले नहीं होते, ऐसे अविवेकी मनुष्य आसुरी, राक्षसी और मोहिनी फकृतिका आश्रय लेते हैं।

Swami Ramsukhdas · meaning

।।9.12।। वृथा आशा, वृथा कर्म और वृथा ज्ञान वाले अविचारीजन राक्षसों के और असुरों के मोहित करने वाले स्वभाव को धारण किये रहते हैं।।

Swami Tejomayananda · simple

भाष्य

Acharya आदि शंकराचार्य · advaita

।।9.12।। --,मोघाशाः वृथा आशाः आशिषः येषां ते मोघाशाः? तथा मोघकर्माणः यानि च अग्निहोत्रादीनि तैः अनुष्ठीयमानानि कर्माणि तानि च? तेषां भगवत्परिभवात्? स्वात्मभूतस्य अवज्ञानात्? मोघान्येव निष्फलानि कर्माणि भवन्तीति मोघकर्माणः। तथा मोघज्ञानाः मोघं निष्फलं ज्ञानं येषां ते मोघज्ञानाः? ज्ञानमपि तेषां निष्फलमेव स्यात्। विचेतसः विगतविवेकाश्च ते भवन्ति इत्यभिप्रायः। किञ्च -- ते भवन्ति राक्षसीं रक्षसां प्रकृतिं स्वभावम् आसुरीम् असुराणां च प्रकृतिं मोहिनीं मोहकरीं देहात्मवादिनीं श्रिताः आश्रिताः? छिन्द्धि? भिन्द्धि? पिब? खाद? परस्वमपहर? इत्येवं वदनशीलाः क्रूरकर्माणो भवन्ति इत्यर्थः? असुर्या नाम ते लोकाः (ई0 उ0 3) इति श्रुतेः।।ये पुनः श्रद्दधानाः भगवद्भक्तिलक्षणे मोक्षमार्गे प्रवृत्ताः --,

मुख्य शब्द

actionknowledgeact