डिजिटल वृंदावन
Digital Vrindavan
मोक्षसंन्यासयोग
18.65श्रीकृष्ण

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे।।18.65।।

man-manā bhava mad-bhakto mad-yājī māṁ namaskuru mām evaiṣhyasi satyaṁ te pratijāne priyo ‘si me

।।18.65।।तू मेरा भक्त हो जा, मेरेमें मनवाला हो जा, मेरा पूजन करनेवाला हो जा और मेरेको नमस्कार कर। ऐसा करनेसे तू मेरेको ही प्राप्त हो जायगा -- यह मैं तेरे सामने सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ; क्योंकि तू मेरा अत्यन्त प्रिय है।

भक्तिमनसमर्पण

शब्दार्थ

mat-manāḥ

thinking of me

bhava

be

mat-bhaktaḥ

my devotee

mat-yājī

worship me

mām

to me

namaskuru

offer obeisance

mām

to me

eva

certainly

eṣhyasi

you will come

satyam

truly

te

to you

pratijāne

I promise

priyaḥ

dear

asi

you are

me

to me

अनुवाद

Fix your mind on Me, be devoted to Me, sacrifice to Me, bow down to Me. You will come to Me; I truly promise you this, for you are dear to Me.

Swami Sivananda · meaning

Dedicate yourself to Me, worship Me, sacrifice all for Me, prostrate yourself before Me, and you will surely come to Me. I truly pledge to you; you are My beloved.

Shri Purohit Swami · simple

।।18.65।।तू मेरा भक्त हो जा, मेरेमें मनवाला हो जा, मेरा पूजन करनेवाला हो जा और मेरेको नमस्कार कर। ऐसा करनेसे तू मेरेको ही प्राप्त हो जायगा -- यह मैं तेरे सामने सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ; क्योंकि तू मेरा अत्यन्त प्रिय है।

Swami Ramsukhdas · meaning

।।18.65।। तुम मच्चित, मद्भक्त और मेरे पूजक (मद्याजी) बनो और मुझे नमस्कार करो; (इस प्रकार) तुम मुझे ही प्राप्त होगे; यह मैं तुम्हे सत्य वचन देता हूँ,(क्योंकि) तुम मेरे प्रिय हो।।

Swami Tejomayananda · simple

भाष्य

Acharya आदि शंकराचार्य · advaita

।।18.65।। --,मन्मनाः भव मच्चित्तः भव। मद्भक्तः भव मद्भजनो भव। मद्याजी मद्यजनशीलो भव। मां नमस्कुरु नमस्कारम् अपि ममैव कुरु। तत्र एवं वर्तमानः वासुदेवे एव समर्पितसाध्यसाधनप्रयोजनः मामेव एष्यसि आगमिष्यसि। सत्यं ते तव प्रतिजाने? सत्यां प्रतिज्ञां करोमि एतस्मिन् वस्तुनि इत्यर्थः यतः प्रियः असि मे। एवं भगवतः सत्यप्रतिज्ञत्वं बुद्ध्वा भगवद्भक्तेः अवश्यंभावि मोक्षफलम् अवधार्य भगवच्छरणैकपरायणः भवेत् इति वाक्यार्थः।।कर्मयोगनिष्ठायाः परमरहस्यम् ईश्वरशरणताम् उपसंहृत्य? अथ इदानीं कर्मयोगनिष्ठाफलं सम्यग्दर्शनं सर्ववेदान्तसारविहितं वक्तव्यमिति आह --,

मुख्य शब्द

worshipminddevoted