डिजिटल वृंदावन
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मोक्षसंन्यासयोग
18.22श्रीकृष्ण

यत्तु कृत्स्नवदेकस्मिन्कार्ये सक्तमहैतुकम्।अतत्त्वार्थवदल्पं च तत्तामसमुदाहृतम्।।18.22।।

yat tu kṛitsna-vad ekasmin kārye saktam ahaitukam atattvārtha-vad alpaṁ cha tat tāmasam udāhṛitam

।।18.22।।किंतु जो (ज्ञान) एक कार्यरूप शरीरमें ही सम्पूर्णके तरह आसक्त है तथा जो युक्तिरहित, वास्तविक ज्ञानसे रहित और तुच्छ है, वह तामस कहा गया है।

विद्या

शब्दार्थ

yat

which

tu

but

kṛitsna-vat

as if it encompasses the whole

ekasmin

in single

kārye

action

saktam

engrossed

ahaitukam

without a reason

atattva-artha-vat

not based on truth

alpam

fragmental

cha

and

tat

that

tāmasam

in the mode of ignorance

udāhṛitam

is said to be

अनुवाद

But that which clings to one single effect as if it were the whole, without reason, without any foundation in Truth, and is trivial—that is declared to be Tamasic.

Swami Sivananda · meaning

But that which clings blindly to one idea as if it were all, without logic, truth, or insight, has its origin in darkness.

Shri Purohit Swami · simple

।।18.22।।किंतु जो (ज्ञान) एक कार्यरूप शरीरमें ही सम्पूर्णके तरह आसक्त है तथा जो युक्तिरहित, वास्तविक ज्ञानसे रहित और तुच्छ है, वह तामस कहा गया है।

Swami Ramsukhdas · meaning

।।18.22।। और जिस ज्ञान के द्वारा मनुष्य एक कार्य (शरीर) में ही आसक्त हो जाता है, मानो वह (कार्य ही) पूर्ण वस्तु हो तथा जो (ज्ञान) हेतुरहित (अयुक्तिक), तत्त्वार्थ से रहित तथा संकुचित (अल्प) है, वह (ज्ञान) तामस है।।

Swami Tejomayananda · simple

भाष्य

Acharya आदि शंकराचार्य · advaita

।।18.22।। --,यत् (तु गी0 में) ज्ञानं कृत्स्नवत् समस्तवत् सर्वविषयमिव एकस्मिन् कार्ये देहे बहिर्वा प्रतिमादौ सक्तम् एतावानेव आत्मा ईश्वरो वा? न अतः परम् अस्ति इति? यथा नग्नक्षपणकादीनां शरीरान्तर्वर्ती देहपरिमाणो जीवः? ईश्वरो वा पाषाणदार्वादिमात्रम्? इत्येवम् एकस्मिन् कार्ये सक्तम्? अहैतुकं हेतुवर्जितं निर्युक्तिकम्? अतत्त्वार्थवत् अयथाभूतार्थवत्? यथाभूतः अर्थः तत्त्वार्थः? सः अस्य ज्ञेयभूतः अस्तीति तत्त्वार्थवत्? न तत्त्वार्थवत् अतत्त्वार्थवत् अहैतुकत्वादेव अल्पं च? अल्पविषयत्वात् अल्पफलत्वाद्वा। तत् तामसम् उदाहृतम्। तामसानां हि प्राणिनाम् अविवेकिनाम् ईदृशं ज्ञानं दृश्यते।।अथ इदानीं कर्मणः त्रैविध्यम् उच्यते --,

मुख्य शब्द

truth