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क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग
13.30श्रीकृष्ण

प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः।यः पश्यति तथाऽऽत्मानमकर्तारं स पश्यति।।13.30।।

prakṛityaiva cha karmāṇi kriyamāṇāni sarvaśhaḥ yaḥ paśhyati tathātmānam akartāraṁ sa paśhyati

।।13.30।।जो सम्पूर्ण क्रियाओंको सब प्रकारसे प्रकृतिके द्वारा ही की जाती हुई देखता है और अपने-आपको अकर्ता देखता (अनुभव करता) है, वही यथार्थ देखता है।

कर्मधर्मक्रियाविद्या

शब्दार्थ

prakṛityā

by material nature

eva

truly

cha

also

karmāṇi

actions

kriyamāṇāni

are performed

sarvaśhaḥ

all

yaḥ

who

paśhyati

see

tathā

also

ātmānam

(embodied) soul

akartāram

actionless

saḥ

they

paśhyati

see

अनुवाद

He sees, who sees that all actions are performed solely by Nature and that the Self is without action.

Swami Sivananda · meaning

He who understands that it is only the Law of Nature that brings action to fruition, and that the Self never acts, alone knows the Truth.

Shri Purohit Swami · simple

।।13.30।।जो सम्पूर्ण क्रियाओंको सब प्रकारसे प्रकृतिके द्वारा ही की जाती हुई देखता है और अपने-आपको अकर्ता देखता (अनुभव करता) है, वही यथार्थ देखता है।

Swami Ramsukhdas · meaning

।।13.30।। जो पुरुष समस्त कर्मों को सर्वश: प्रकृति द्वारा ही किये गये देखता है तथा आत्मा को अकर्ता देखता है, वही (वास्तव में) देखता है।।

Swami Tejomayananda · simple

भाष्य

Acharya आदि शंकराचार्य · advaita

।।13.30।। -- प्रकृत्या प्रकृतिः भगवतः माया त्रिगुणात्मिका? मायां तु प्रकृतिं विद्यात् (श्वे0 उ0 4।10) इति मन्त्रवर्णात्? तया प्रकृत्यैव च न अन्येन महदादिकार्यकरणाकारपरिणतया कर्माणि वाङ्मनःकायारभ्याणि क्रियमाणानि निर्वर्त्यमानानि सर्वशः सर्वप्रकारैः यः पश्यति उपलभते? तथा आत्मानं क्षेत्रज्ञम् अकर्तारं सर्वोपाधिविवर्जितं सः पश्यति? सः परमार्थदर्शी इत्यभिप्रायः निर्गुणस्य अकर्तुः निर्विशेषस्य आकाशस्येव भेदे प्रमाणानुपपत्तिः इत्यर्थः।।पुनरपि तदेव सम्यग्दर्शनं शब्दान्तरेण प्रपञ्चयति --,

मुख्य शब्द

actionlawperformtruth