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कर्मयोग
3.25श्रीकृष्ण

सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत। कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्िचकीर्षुर्लोकसंग्रहम्।।3.25।।

saktāḥ karmaṇyavidvānso yathā kurvanti bhārata kuryād vidvāns tathāsaktaśh chikīrṣhur loka-saṅgraham

।।3.25 -- 3.26।। हे भरतवंशोद्भव अर्जुन! कर्ममें आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार कर्म करते हैं, आसक्तिरहित विद्वान भी लोकसंग्रह करना चाहता हुआ उसी प्रकार कर्म करे।  तत्त्वज्ञ महापुरुष कर्मोंमें आसक्तिवाले अज्ञानी मनुष्योंकी बुद्धिमें भ्रम उत्पन्न न करे, प्रत्युत स्वयं समस्त कर्मोंको अच्छी तरहसे करता हुआ उनसे भी वैसे ही करवाये।

कर्मवैराग्यक्रिया

शब्दार्थ

saktāḥ

attached

karmaṇi

duties

avidvānsaḥ

the ignorant

yathā

as much as

kurvanti

act

bhārata

scion of Bharat (Arjun)

kuryāt

should do

vidvān

the wise

tathā

thus

asaktaḥ

unattached

chikīrṣhuḥ

wishing

loka-saṅgraham

welfare of the world

अनुवाद

As the ignorant act out of attachment to action, O Bharata, so should the wise act without attachment, wishing for the welfare of the world.

Swami Sivananda · meaning

As the ignorant act, out of their fondness for action, so should the wise act without attachment, fixing their eyes, O Arjuna, only on the welfare of the world.

Shri Purohit Swami · simple

।।3.25 -- 3.26।। हे भरतवंशोद्भव अर्जुन! कर्ममें आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार कर्म करते हैं, आसक्तिरहित विद्वान भी लोकसंग्रह करना चाहता हुआ उसी प्रकार कर्म करे।  तत्त्वज्ञ महापुरुष कर्मोंमें आसक्तिवाले अज्ञानी मनुष्योंकी बुद्धिमें भ्रम उत्पन्न न करे, प्रत्युत स्वयं समस्त कर्मोंको अच्छी तरहसे करता हुआ उनसे भी वैसे ही करवाये।

Swami Ramsukhdas · meaning

।।3.25।। हे भारत ! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जैसे कर्म करते हैं वैसे ही विद्वान् पुरुष अनासक्त होकर, लोकसंग्रह (लोक कल्याण) की इच्छा से कर्म करे।।

Swami Tejomayananda · simple

भाष्य

Acharya आदि शंकराचार्य · advaita

।।3.25।। सक्ताः कर्मणि अस्य कर्मणः फलं मम भविष्यति इति केचित् अविद्वांसः यथा कुर्वन्ति भारत कुर्यात् विद्वान् आत्मवित् तथा असक्तः सन्। तद्वत् किमर्थं करोति तत् श्रृणु चिकीर्षुः कर्तुमिच्छुः लोकसंग्रहम्।।एवं लोकसंग्रहं चिकीर्षोः न मम आत्मविदः कर्तव्यमस्ति अन्यस्य वा लोकसंग्रहं मुक्त्वा। ततः तस्य आत्मविदः इदमुपदिश्यते

मुख्य शब्द

actionattachmentact