डिजिटल वृंदावन
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ज्ञानकर्मसंन्यासयोग
4.14श्रीकृष्ण

न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा। इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते।।4.14।।

na māṁ karmāṇi limpanti na me karma-phale spṛihā iti māṁ yo ’bhijānāti karmabhir na sa badhyate

।।4.13 -- 4.14।। मेरे द्वारा गुणों और कर्मोंके विभागपूर्वक चारों वर्णोंकी रचना की गयी है। उस-(सृष्टि-रचना आदि-) का कर्ता होनेपर भी मुझ अव्यय परमेश्वरको तू अकर्ता जान। कारण कि कर्मोंके फलमें मेरी स्पृहा नहीं है, इसलिये मुझे कर्म लिप्त नहीं करते। इस प्रकार जो मुझे तत्त्वसे जान लेता है, वह भी कर्मोंसे नहीं बँधता।

कर्मज्ञानक्रिया

शब्दार्थ

na

not

mām

me

karmāṇi

activities

limpanti

taint

na

nor

me

my

karma-phale

the fruits of action

spṛihā

desire

iti

thus

mām

me

yaḥ

who

abhijānāti

knows

karmabhiḥ

result of action

na

never

saḥ

that person

badhyate

is bound

अनुवाद

Actions do not taint Me, nor do I have a desire for the fruit of actions. He who knows Me thus is not bound by actions.

Swami Sivananda · meaning

My actions do not bind Me, nor do I desire anything that they can bring. He who thus realizes Me is not enslaved by action.

Shri Purohit Swami · simple

।।4.13 -- 4.14।। मेरे द्वारा गुणों और कर्मोंके विभागपूर्वक चारों वर्णोंकी रचना की गयी है। उस-(सृष्टि-रचना आदि-) का कर्ता होनेपर भी मुझ अव्यय परमेश्वरको तू अकर्ता जान। कारण कि कर्मोंके फलमें मेरी स्पृहा नहीं है, इसलिये मुझे कर्म लिप्त नहीं करते। इस प्रकार जो मुझे तत्त्वसे जान लेता है, वह भी कर्मोंसे नहीं बँधता।

Swami Ramsukhdas · meaning

।।4.14।। कर्म मुझे लिप्त नहीं करते;  न मुझे कर्मफल में स्पृहा है। इस प्रकार मुझे जो जानता है, वह भी कर्मों से नहीं बन्धता है।।

Swami Tejomayananda · simple

भाष्य

Acharya आदि शंकराचार्य · advaita

।।4.14।। न मां तानि कर्माणि लिम्पन्ति देहाद्यारम्भकत्वेन अहंकाराभावात्। न च तेषां कर्मणां फलेषु मे मम स्पृहा तृष्णा। येषां तु संसारिणाम् अहं कर्ता इत्यभिमानः कर्मसु स्पृहा तत्फलेषु च तान् कर्माणि लिम्पन्ति इति युक्तम् तदभावात् न मां कर्माणि लिम्पन्ति। इति एवं यः अन्योऽपि माम् आत्मत्वेन अभिजानाति नाहं कर्ता न मे कर्मफले स्पृहा इति सः कर्मभिः न बध्यते तस्यापि न देहाद्यारम्भकाणि कर्माणि भवन्ति इत्यर्थः।।नाहं कर्ता न मे कर्मफले स्पृहा इति

मुख्य शब्द

actionrealizeact