डिजिटल वृंदावन
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दैवासुरसम्पद्विभागयोग
16.8श्रीकृष्ण

असत्यमप्रतिष्ठं ते जगदाहुरनीश्वरम्।अपरस्परसम्भूतं किमन्यत्कामहैतुकम्।।16.8।।

asatyam apratiṣhṭhaṁ te jagad āhur anīśhvaram aparaspara-sambhūtaṁ kim anyat kāma-haitukam

।।16.8।।वे कहा करते हैं कि संसार असत्य, अप्रतिष्ठित और बिना ईश्वरके अपने-आप केवल स्त्री-पुरुषके संयोगसे पैदा हुआ है। इसलिये काम ही इसका कारण है, और कोई कारण नहीं है।

योगजीवनविद्या

शब्दार्थ

asatyam

without absolute truth

apratiṣhṭham

without any basis

te

they

jagat

the world

āhuḥ

say

anīśhvaram

without a God

aparaspara

without cause

sambhūtam

created

kim

what

anyat

other

kāma-haitukam

for sexual gratification only

अनुवाद

They say, "This universe is without truth, without a moral basis, without a God, brought about by mutual union, with lust as its cause; what else?"

Swami Sivananda · meaning

They say the universe is an accident with no purpose and no God. Life is created through sexual union, a product of lust and nothing else.

Shri Purohit Swami · simple

।।16.8।।वे कहा करते हैं कि संसार असत्य, अप्रतिष्ठित और बिना ईश्वरके अपने-आप केवल स्त्री-पुरुषके संयोगसे पैदा हुआ है। इसलिये काम ही इसका कारण है, और कोई कारण नहीं है।

Swami Ramsukhdas · meaning

।।16.8।। वे कहते हैं कि यह जगत् आश्रयरहित, असत्य और ईश्वर रहित है, यह (स्त्रीपुरुष के) परस्पर कामुक संबंध से ही उत्पन्न हुआ है, और (इसका कारण) क्या हो सकता है?

Swami Tejomayananda · simple

भाष्य

Acharya आदि शंकराचार्य · advaita

।।16.8।। --,असत्यं यथा वयम् अनृतप्रायाः तथा इदं जगत् सर्वम् असत्यम्? अप्रतिष्ठं च न अस्य धर्माधर्मौ प्रतिष्ठा अतः अप्रतिष्ठं च? इति ते आसुराः जनाः जगत् आहुः? अनीश्वरम् न च धर्माधर्मसव्यपेक्षकः अस्य शासिता ईश्वरः विद्यते इति अतः अनीश्वरं जगत् आहुः। किं च? अपरस्परसंभूतं कामप्रयुक्तयोः स्त्रीपुरुषयोः अन्योन्यसंयोगात् जगत् सर्वं संभूतम्। किमन्यत् कामहैतुकं कामहेतुकमेव कामहैतुकम्। किमन्यत् जगतः कारणम् न किञ्चित् अदृष्टं धर्माधर्मादि कारणान्तरं विद्यते जगतः काम एव प्राणिनां कारणम् इति लोकायतिकदृष्टिः इयम्।।

मुख्य शब्द

unionlifetruth