वृंदावन TV
मेरो वृंदावन
राजविद्याराजगुह्ययोग
9.34श्रीकृष्ण

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु। मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः।।9.34।।

man-manā bhava mad-bhakto mad-yājī māṁ namaskuru mām evaiṣhyasi yuktvaivam ātmānaṁ mat-parāyaṇaḥ

।।9.34।। तू मेरा भक्त हो जा, मेरेमें मनवाला हो जा, मेरा पूजन करनेवाला हो जा और मेरेको नमस्कार कर। इस प्रकार मेरे साथ अपने-आपको लगाकर, मेरे परायण हुआ तू मेरेको ही प्राप्त होगा। ,

मनसमर्पणशरणागति

शब्दार्थ

mat-manāḥ

always think of me

bhava

be

mat

my

bhaktaḥ

devotee

mat

my

yājī

worshipper

mām

to me

namaskuru

offer obeisances

mām

to me

eva

certainly

eṣhyasi

you will come

yuktvā

united with me

evam

thus

ātmānam

your mind and body

mat-parāyaṇaḥ

having dedicated to me

अनुवाद

Fix your mind on Me; be devoted to Me; sacrifice to Me; bow down to Me; having thus united your whole self to Me, taking Me as the supreme goal, you will come to Me.

Swami Sivananda · meaning

Fix your mind on Me, devote yourself to Me, sacrifice for Me, surrender to Me, make Me the object of your aspirations, and you shall assuredly become one with Me, Who am your own Self.

Shri Purohit Swami · simple

।।9.34।। तू मेरा भक्त हो जा, मेरेमें मनवाला हो जा, मेरा पूजन करनेवाला हो जा और मेरेको नमस्कार कर। इस प्रकार मेरे साथ अपने-आपको लगाकर, मेरे परायण हुआ तू मेरेको ही प्राप्त होगा। ,

Swami Ramsukhdas · meaning

।।9.34।। (तुम) मुझमें स्थिर मन वाले बनो; मेरे भक्त और मेरे पूजन करने वाले बनो; मुझे नमस्कार करो; इस प्रकार मत्परायण (अर्थात् मैं ही जिसका परम लक्ष्य हूँ ऐसे) होकर आत्मा को मुझसे युक्त करके तुम मुझे ही प्राप्त होओगे।।

Swami Tejomayananda · simple

भाष्य

Acharya आदि शंकराचार्य · advaita

।।9.34।। --,मयि वासुदेवे मनः यस्य स त्वं मन्मनाः भव तथा मद्भक्तः भव मद्याजी मद्यजनशीलः भव। माम् एव च नमस्कुरु। माम् एव ईश्वरम् एष्यसि आगमिष्यसि युक्त्वा समाधाय चित्तम्। एवम् आत्मानम्? अहं हि सर्वेषां भूतानाम् आत्मा? परा च गतिः? परम् अयनम्? तं माम् एवंभूतम्? एष्यसि इति अतीतेन संबन्धः? मत्परायणः सन् इत्यर्थः।।इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोवन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य,श्रीमच्छंकरभगवतः कृतौ श्रीमद्भगवद्गीताभाष्येनवमोऽध्यायः।।,

मुख्य शब्द

minddevotedsurrender